He Loves My Struggles

उसे महताब मेरी आँखों में नहीं उनके नीचे पड़े काले घेरों में दिखता है। वो मेरे माथे की शिकन को चूमता नहीं केवल हथेलियों में मेरे चेहरे को भर अपने कंधों पर रख लेता है। मेरा थकन भरा बदन उसे परेशान नहीं करता अंगड़ाइयों में मेरी वो शाम कर लेता है। उसे मेरी झुकी पलकों में अदाएँ नहीं दिखती मेरी उठती हुई नज़रों में आग देखता है। जो मैं गर्दन झुका किताबों में गुम हो जाती हूँ वो कमरे की चौखट से झाँककर खिल उठता है। उसे जलन नहीं होती आफताब से जो मेरे सीले बालों को छूकर चमकता है। वो शीशे में कैद मेरी परछाइ से खफ़ा है कहता है, "यह तुम्हारी खूबसूरती की कद्र नहीं करता है।"

May 19, 2021